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क्या आपने बैलेंसिंग रॉक देखी है? दो पत्थरों का बेहतरीन संतुलन देखकर आप हैरान रह जाएंगे

बैलेंसिंग रॉक्स, को एक चमत्कार के तौर पर देखा जाता है। गोंड शासक राजा मदन सिंह द्वारा निर्मित मदन महल किले के रास्ते में स्थित, बैलेंसिंग रॉक्स के बारे में कहा जाता है कि यह हजारों साल पहले ज्वालामुखी विस्फोट से बना था।

मध्य प्रदेश के जबलपुर में पर्यटन स्थलों की कोई कमी नहीं है। आज हम आपको यहां एक ऐसी जगह के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। आज हम आपको यहां के बैलेंसिंग रॉक के बारे में बताने जा रहे हैं।

भुकंप के बाद भी ये अपनी जगह से नहीं हिलता है

बैलेंसिंग रॉक्स, को एक चमत्कार के तौर पर देखा जाता है। गोंड शासक राजा मदन सिंह द्वारा निर्मित मदन महल किले के रास्ते में स्थित, बैलेंसिंग रॉक्स के बारे में कहा जाता है कि यह हजारों साल पहले ज्वालामुखी विस्फोट से बना था।

भूवैज्ञानिक यह बताने में विफल रहे कि ये चट्टानें इतने सालों तक बिना हिले-डुले कैसे रह सकती हैं।

हालांकि, ऐसा माना जाता है कि यह रॉक का वजन और ग्रेविटेशनल पुल की वजह से  इन चट्टानों ने 1997 में आए भूकंप को भी झेल लिया था।

बैलेंसिंग रॉक जबलपुर शहर से मात्र छह किमी की दूरी पर स्थित है। एक ही चट्टान पर दो पत्थरों का बेहतरीन संतुलन इस स्थान पर देखने को मिलता है। खास बात यह है कि 6.5 रिक्टर की तीव्रता वाले भूकंप के बाद भी इन पत्थरों का संतुलन नहीं बिगड़ता है।

जबलपुर की इस खूबसूरत जगह को देखने के लिए बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। ये बैलेंसिंग रॉक्स पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। अगर आप जबलपुर की यात्रा कर रहे हैं तो आपको इस बैलेंसिंग रॉक को एक बार जरूर देखना चाहिए।

स्थान: बैलेंसिंग रॉक मदन महल किले, जबलपुर के आधार पर स्थित हैं।

कीमत: बैलेंसिंग रॉक को देखने के लिए आपको INR 100 प्रति पर्यटक देना पड़ता है।

समय: इस स्थान पर सुबह 6 बजे से रात 8 बजे के बीच जाया जा सकता है।

घूमने का सबसे अच्छा समय: बैलेंसिंग रॉक को देखने के लिए आप साल में कभी भी जा सकते हैं।

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